दोस्तोँ ये बात उस समय की है जब मेरी दादी प्राइमरी की अध्यापिका बनी थी आइये सुनते हैँ उन्ही की जुबानी-
"डिप्टी साहब कुछ अधिकारियोँ के साथ गाँव आए हुए थे, गाँव के लोग अधिकारियोँ को देखकर सहम गये, क्योँकि डिप्टी साहब दसवीँ पास थे इसलिये गाँव के लोग उनकी बहुत इज्जत करते थे । गाँव मेँ आते हीँ डिप्टी साहब ने कहा, "हम लोग प्राइमरी के लिये मास्टर खोज रहे हैँ, क्या कोई है गाँव का जिसने पाँचवी पास किया है?"
सुधाकर चाचा बोले- अरे डिप्टी साहब ई गाँव माँ पाँच पास कहाँ मिलिहैँ ।
डिप्टी साहब- देखो अगर कोई हो तो बता दो, 75 रु. महीने तनख्वाह मिलेगी ।
सुधाकर चाचा- अब साहेब मनसेधु (पुरुष) तौ नाही बाटेन, एक एही हमार बिटियवा बाटै, चौथी तक बढ़े बा।
डिप्टी साहब- ठीक है आप अपनी बेटी को बुलाइये।
सुधाकर चाचा- लेकिन साहेब ऊ तौ क,ख,ग,घ बिसर गै बा ।
डिप्टी साहब- कोई बात नहीँ सब याद हो जाएगा,
.
.
और उसी दिन गाँव के स्कूल मेँ मेरी दादी की नियुक्ति हो गयी ।
आज मेरी दादी को पेँसन मिल रहा है, और अक्सर वो यही सवाल करती हैँ,
का भवा बेटवा तोहरे नौकरिया कै ?
.
.
अब दादी जी को क्या पता कि तब और अब मेँ कितना फर्क है, अब तो डाक्टर, इन्जीनियर और पीएचडी डिग्री धारक कतार मेँ खड़े हैँ प्राइमरी की नौकरी के लिये ।
फिर भी सरकार को योग्य अध्यापक नही मिल पा रहे हैँ, वाह रे जमाना !!!
"डिप्टी साहब कुछ अधिकारियोँ के साथ गाँव आए हुए थे, गाँव के लोग अधिकारियोँ को देखकर सहम गये, क्योँकि डिप्टी साहब दसवीँ पास थे इसलिये गाँव के लोग उनकी बहुत इज्जत करते थे । गाँव मेँ आते हीँ डिप्टी साहब ने कहा, "हम लोग प्राइमरी के लिये मास्टर खोज रहे हैँ, क्या कोई है गाँव का जिसने पाँचवी पास किया है?"
सुधाकर चाचा बोले- अरे डिप्टी साहब ई गाँव माँ पाँच पास कहाँ मिलिहैँ ।
डिप्टी साहब- देखो अगर कोई हो तो बता दो, 75 रु. महीने तनख्वाह मिलेगी ।
सुधाकर चाचा- अब साहेब मनसेधु (पुरुष) तौ नाही बाटेन, एक एही हमार बिटियवा बाटै, चौथी तक बढ़े बा।
डिप्टी साहब- ठीक है आप अपनी बेटी को बुलाइये।
सुधाकर चाचा- लेकिन साहेब ऊ तौ क,ख,ग,घ बिसर गै बा ।
डिप्टी साहब- कोई बात नहीँ सब याद हो जाएगा,
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और उसी दिन गाँव के स्कूल मेँ मेरी दादी की नियुक्ति हो गयी ।
आज मेरी दादी को पेँसन मिल रहा है, और अक्सर वो यही सवाल करती हैँ,
का भवा बेटवा तोहरे नौकरिया कै ?
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अब दादी जी को क्या पता कि तब और अब मेँ कितना फर्क है, अब तो डाक्टर, इन्जीनियर और पीएचडी डिग्री धारक कतार मेँ खड़े हैँ प्राइमरी की नौकरी के लिये ।
फिर भी सरकार को योग्य अध्यापक नही मिल पा रहे हैँ, वाह रे जमाना !!!

