Thursday, 21 February 2013

मेरी दादी मस्टरानी

दोस्तोँ ये बात उस समय की है जब मेरी दादी प्राइमरी की अध्यापिका बनी थी आइये सुनते हैँ उन्ही की जुबानी-
"डिप्टी साहब कुछ अधिकारियोँ के साथ गाँव आए हुए थे, गाँव के लोग अधिकारियोँ को देखकर सहम गये, क्योँकि डिप्टी साहब दसवीँ पास थे इसलिये गाँव के लोग उनकी बहुत इज्जत करते थे । गाँव मेँ आते हीँ डिप्टी साहब ने कहा, "हम लोग प्राइमरी के लिये मास्टर खोज रहे हैँ, क्या कोई है गाँव का जिसने पाँचवी पास किया है?"
सुधाकर चाचा बोले- अरे डिप्टी साहब ई गाँव माँ पाँच पास कहाँ मिलिहैँ ।
डिप्टी साहब- देखो अगर कोई हो तो बता दो, 75 रु. महीने तनख्वाह मिलेगी ।
सुधाकर चाचा- अब साहेब मनसेधु (पुरुष) तौ नाही बाटेन, एक एही हमार बिटियवा बाटै, चौथी तक बढ़े बा।
डिप्टी साहब- ठीक है आप अपनी बेटी को बुलाइये।
सुधाकर चाचा- लेकिन साहेब ऊ तौ क,ख,ग,घ बिसर गै बा ।
डिप्टी साहब- कोई बात नहीँ सब याद हो जाएगा,
.
.
और उसी दिन गाँव के स्कूल मेँ मेरी दादी की नियुक्ति हो गयी ।
आज मेरी दादी को पेँसन मिल रहा है, और अक्सर वो यही सवाल करती हैँ,
का भवा बेटवा तोहरे नौकरिया कै ?
.
.
अब दादी जी को क्या पता कि तब और अब मेँ कितना फर्क है, अब तो डाक्टर, इन्जीनियर और पीएचडी डिग्री धारक कतार मेँ खड़े हैँ प्राइमरी की नौकरी के लिये ।
फिर भी सरकार को योग्य अध्यापक नही मिल पा रहे हैँ, वाह रे जमाना !!!

सच्ची प्रार्थना



एक लड़का था..

बहुत ही नेक और

होशियार था . पढ़ने में

भी काफी तेज था ..

एक दिन वो मंदिर में

गया ..

मंदिर के अन्दर

सभी भक्तो भगवान के

दर्शन

कर रहे थे और मंत्र बोल

रहे थे ..कुछ भक्त

स्तुतिगान भी कर रहे थे ..

कुछ भक्त संस्कृत के

काफी मुश्केल श्लोक

भी बोल रहे थे ..

लड़के ने कुछ देर यह सब

देखा और उसके चहेरे

पर

युही मायूशी छा गयी ..

क्युकी उसे यह सब

प्रार्थना और मंत्र

बोलना आता नहीं था ..

कुछ देर वहा खड़ा रहा और

कुछ उपाय खोजने

लगा ..

लड़के के चहेरे पर

मुस्कराहट छा गयी ..उसने

अपनी आँखे बंध की , अपने

दोनों हाथ जोड़े और

दस बार अ आ इ ई

(हिन्दीवर्णमाला) बोल

गया …

मंदिर के पुजारी ने यह

देखा उसने लड़के से

पूछा की ” बेटे तुम यह

क्या कर रहे हो , लड़के ने

पूरी बात बताई … “

पुजारी ने कहा की ” बेटे

भगवान् से इस तरह से

प्रार्थना नहीं की जा सकती ,

तुम तो अ आ इ ई

बोल रहे हो..”

लड़के ने उत्तर दिया की ”

मुझे प्रार्थना , मंत्र ,

गीत नहीं आते . मुझे सिर्फ

अ आ इ ई

ही आती है . प्रार्थना ,

मंत्र , गीत यह सब अ

आ इ ई से ही बनते है . में दस

बार अ आ इ ई

बोल गया हूँ . यह सब शब्द

में से भगवान अपने

लिए खुद प्रार्थना , मंत्र ,

गीत बना लेंगे..”

लड़के की बात सुनकर

पुजारी जी चुप हो गए .

उनको अपनी भूल

का अहेसास हुआ .. उन्होंने

लड़के की समझ

को स्वीकार किया..

बोध –शीख

प्रार्थना हदय को साफ

और निर्मल करती है ..

शब्दों का महत्व नहीं है –

भाव का महत्व है ..

नेक दिल से की हुई

प्राथना भगवान तक जरूर

पहुचती है ..

प्रार्थना के अन्दर जब

भाव मिल जाता है

तो भगवान् जरूर मिलते है..

राष्ट्रभाषा

एक बूढ़ी औरत....
राजघाट पर बैठे- बैठे रो रही थी
न जाने किसका पाप था जो
अपने आंसुओं से धो रही थी।
मैंने पूछा- माँ! तुम कौन?
मेरी बात सुन कर
वह बहुत देर तक रही मौन
लेकिन जैसे ही उसने
अपना मुह खोला
लगा दिल्ली का सिंहासन डोला
वह बोली- अरे! तुम जैसे
नालायको के कारण शर्मिंदा हूँ,
न जाने अब तक क्यो जिंदा हूँ।
अपने लोगो की उपेक्षा के कारण
तार- तार हूँ, चिंदी हूँ,
मुझे गौर से देख...
मै राष्ट्रभाषा हिन्दी हूँ।
जिसे होना था महारानी
आज नौकरानी है
हिन्दी के आँचल में तो है सद्भाव
मगर आँखों में पानी है।
गोरी मेम को दिल्ली की गद्दी
और मुझे बनवास ?
कदम- कदम पर होता है
मेरा उपहास।
सारी दुनिया भारत को देख
कारण चमत्कृत है
एक भाषा- माँ अपने ही घर
में बहिष्कृत है
बेटा, मै तुम लोगों के
पापो को ही
बासठ वर्षो से बोझ की तरह
ढो रही हूँ
कुछ और नही कर सकती
इसलिए रो रही हूँ।
अगर तुम्हे मेरे आंसू
पोंछने है तो आगे आओ
सोते हुए देश को जगाओ
और इस गोरी मेम को हटा कर
मुझे गद्दी पर बिठाओ
अरे, मै हिन्दी हूँ
मुझसे मत डरो
हर भाषा को लेकर चलती हूँ
और सबके साथ
दीपावली के दीपक- सा जलती हूँ।

Monday, 18 February 2013

मंजिल मिल ही जायेगी भटकते ही सही, 

                           गुमराह तो वो है जो घर से निकले ही नहीं'

आतंकवाद

नमस्कार ! मेरा नाम आतंकवाद है। मेरे पिताजी का नाम 'अमेरिका' एवं माताजी का नाम 'पाकिस्तान' है। मुझे शांतिप्रिय देशों में आतंक और दहशत फैलाने के लिए पैदा किया गया था। लेकिन जब मै बड़ा हुआ तो अपनी फ़ितरत के मुताबिक पहले अपने बाप पर ही अटैक कर दिया ( 9/11, WTC, pentagon ). फिर मेरे बाप ने मुझे माँ के हवाले करते हुए कहा..लो खुद ही सम्हालो अपने लाडले को। तब से मै अक्सर अपनी माँ को तंग करता रहता हूँ ( बेनजीर भुट्टो का क़त्ल, लाल मस्जिद, बौद्ध स्तूप या क्वेटा धमाके आदि). कभी कभी मै अपने पड़ोसियों को भी परेशान करता हूँ ( भारतीय संसद पर हमला, 26/11, जकार्ता में ऑस्ट्रेलियन दूतावास पर हमला इत्यादि ). लेकिन सबसे ज्यादा मजा मुझे अपनी माँ को तंग करने में आता है... 
और वो बेचारी कुछ कर भी नहीं सकती..आखिर बेटा जो मै ठहरा उसका।
आजकल चीन मेरी देखभाल, रख रखाव और जरूरतों को पूरा कर रहा है इसलिए वो मुझे बहुत पसंद है। मै उसे कभी परेशान नहीं करता..उससे थोडा डरता भी हूँ। ISI, अल कायेदा, हिजबुल मुजाहिदीन, लश्कर ए तोएबा ..आप मुझे इनमे से कोई भी नामदे सकते हो।
कुछ बेवकूफ मुझे मजहब से जोड़कर देखते हैं, जबकि ऐसा कुछ नहीं है। मै आतंकवाद हूँ और सिर्फ आतंकवाद ..मेरा किसी जाति, धर्म, मजहब से कुछ नहीं लेना देना। हाँ ..मै मजहब के नाम पर बेवकूफ बनाकर लोगों का समर्थन जरूर पा लेता हूँ।

आज का सच - ....!!!!

पति : फोन आया था । कल सुबह मां आ रही है।
उनकी ट्रेन सुबह 4 बजे पहुंच जाएगी ।
पत्नी : अभी 4 माह पहले
ही तो तुम्हारी मां यहां से गई हैं।
फिर अचानक कैसे आ रही हैं ? कल रविवार है,
मैंने सोचा था,
कल थोड़ा आराम से उठूंगी, लेकिन
तुम्हारी मां को रविवार
को ही आना है और वह भी सुबह 4 बजे।
इतनी सुबह taxi
कहां से ..... ?

पति : मेरी... नहीं तुम्हारी मां आ रही है।

पत्नी : अरे वाह... मम्मी ......? ..... 2 माह
हो गये उनसे
मिले हुए। सुनो ना मेरे पास taxi वाले का नंबर
भी है उसे फोन कर
लेते हैं कल सुबह ठीक टाईम पर आ जाएगा।
चलो अच्छा है
कल सण्डे है बच्चों का स्कूल भी नहीं है वे
भी नानी को लेने
स्टेशन जा सकेंगे।

JOKE

बुलेट पर बैठे लड़के ने एक्टिवा पर बैठी लड़की से पूछा : कभी बुलेट चलाई है?

लड़की : स्कूटी तेज करके आगे निकल गई.

लड़का : फिर से बराबर आकर बोला: कभी बुलेट चलाई है?

लड़की ने स्कूटी धीरे कर ली और बुलेट वाला आगे निकल गया. आगे जाकर लड़के का एक्सीडेंट हो गया.

लड़की बोली : और चला ले बुलेट.

लड़का : यही तो पूछ रहा था कि चलाई है तो बता देती कि ब्रेक कैसे लगती है?

JOKE

राम: क्यों रो रहे हो दीपू…?

दीपू: मेरी मुर्गी मर गई…

राम: चुप हो जा, मेरा बाप मरा था, तब भी मैं इतना नहीं रोया…

दीपू: तेरा बाप अंडे देता था क्या…!!!

LOVE Marriage



                                                                  Love Lake

बेटा: मम्मी 'लव मैरिज' करने से घरवाले नाराज होते हैं क्या?

मम्मी : तू जरूर किसी चुड़ैल के चक्कर में होगा और यह सब तुझे उसी डायन ने कहा होगा। लड़कियां तो बस लड़कों को फंसाने में ही लगी रहती हैं। जहां अच्छा लड़का देखा शुरू हो गईं... बेटा तू इनसे बच के रहना। ये बहुत मक्कार और कमीनी होती हैं। और इनका तो खानदान भी.......

बेटा: बस मम्मी ... ऐसा कुछ नहीं है। वो तो डैडी बता रहे थे कि आप दोनों की लव मैरिज हुई थी!

स्त्रियाँ क्योँ लगाती हैँ माँग मेँ सिन्दूर और इसकी वैज्ञानिकता क्या?





(1)भारतीय वैदिक परंपरा खासतौर पर हिंदू समाज में शादी के बाद महिलाओं को मांग में सिंदूर भरना आवश्यक हो जाता है। आधुनिक दौर में अब सिंदूर की जगह कुंकु और अन्य चीजों ने ले ली है। सवाल यह उठता है कि आखिर सिंदूर ही क्यों लगाया जाता है। दरअसल इसके पीछे एक बड़ा वैज्ञानिक कारण है। यह मामला पूरी तरह स्वास्थ्य से जुड़ा है। सिर के उस स्थान पर जहां मांग भरी जाने की परंपरा है, मस्तिष्क की एक महत्वपूर्ण ग्रंथी होती है,जिसे ब्रह्मरंध्र कहते हैं। यह अत्यंत संवेदनशील भी होती है।यह मांग के स्थान यानी कपाल के अंत से लेकर सिर के मध्य तक होती है। सिंदूर इसलिए लगाया जाता है क्योंकि इसमें पारा नाम की धातु होती है। पारा ब्रह्मरंध्र के लिए औषधि का काम करता है। महिलाओं को तनाव से दूर रखता है और मस्तिष्क हमेशा चैतन्य अवस्था में रखता है। विवाह के बाद ही मांग इसलिए भरी जाती है क्योंकि विवाहके बाद जब गृहस्थी का दबाव महिला पर आता है तो उसे तनाव, चिंता और अनिद्रा जैसी बीमारिया आमतौर पर घेर लेती हैं।पारा एकमात्र ऐसी धातु है जो तरल रूप में रहती है। यह मष्तिष्क के लिए लाभकारी है, इस कारण सिंदूर मांग में भरा जाता है।

(2)मांग में सिंन्दूर भरना औरतों के लिए सुहागिन होने की निशानी माना जाता है। विवाह के समय वर द्वारा वधू की मांग मे सिंदूर भरने के संस्कार को सुमंगली क्रिया कहते हैं। इसके बाद विवाहिता पति के जीवित रहने तक आजीवन अपनी मांग में सिन्दूर भरती है। हिंदू धर्म के अनुसार मांग में सिंदूर भरना सुहागिन होने का प्रतीक है। सिंदूर नारी श्रंगार का भी एक महत्तवपूर्ण अंग है। सिंदूर मंगल-सूचक भी होता है। शरीर विज्ञान में भी सिंदूर का महत्त्व बताया गया है। सिंदूर में पारा जैसी धातु अधिक होनेके कारण चेहरे पर जल्दी झुर्रियां नहीं पडती। साथ ही इससे स्त्री के शरीर में स्थित विद्युतीय उत्तेजना नियंत्रित होती है। मांग में जहां सिंदूर भरा जाता है, वह स्थान ब्रारंध्र और अध्मि नामक मर्म के ठीक ऊपर होता है। सिंदूर मर्म स्थान को बाहरी बुरे प्रभावों से भी बचाता है। सामुद्रिक शास्त्र में अभागिनी स्त्री के दोष निवारण के लिए मांग में सिंदूर भरने की सलाह दी गई है।