Friday, 15 March 2013

क्या आप जानते हैं?

- नया पेन खरीदने पर 97% लोग
अपना खुद का नाम लिखते हैं।

- एक सामान्य मनुष्य की आँखें 200
अंश की चौड़ाई तक देख सकती हैं।

- पका हुआ तरबूज कच्चे तरबूज
की अपेक्षा अधिक खोखला होता है।

- लगभग छः माह की उम्र होने तक
रोने पर भी बच्चों की आँख से आँसू
नहीं निकलते।

- अपेक्षाकृत गरम पानी से सिंचाई
किए जाने वाले पौधे ठण्डे पानी से
सिंचाई किए जाने वाले
पौधों की अपेक्षा तेजी से बढ़ते हैं।

- एक घण्टे तक हेडफोन लगाए रहने पर
कान के अंदर बैक्टीरिया 700
गुना बढ़ जाते हैं।

- उम्र बढ़ने के साथ मनुष्य के कान और
नाक के आकार में वृद्धि होती है किन्तु
आँखें जन्म से मृत्यु तक एक ही आकार
की रहती हैं।

- उँगलियों के निशान जैसे ही प्रत्येक
व्यक्ति के जीभ के निशान भी अलग-
अलग होते हैं।

- स्वीडन में एक ऐसा होटल है
जो पूर्णतया बर्फ का बना है,
प्रतिवर्ष इसका पुनर्निर्माण
किया जाता है।

- उँगलियाँ तोड़ने पर जो आवाज
सुनाई देती है वह वास्तव में
नाइट्रोजन बबल्स के बर्स्ट होने
की आवाज होती है

आम आदमी

रचनाकार: शंकर पुण्तांबेकर
*******************
नाव चली जा रही थी।
मझदार में नाविक ने कहा,
"नाव में बोझ ज्यादा है, कोई एक आदमी कम
हो जाए तो अच्छा, नहीं तो नाव डूब जाएगी।"
अब कम हो जए तो कौन कम हो जाए? कई लोग
तो तैरना नहीं जानते थे: जो जानते थे उनके लिए
भी परले चार जाना खेल नहीं था। नाव में
सभी प्रकार के लोग थे-
डाक्टर,अफसर,वकील,व्यापारी,
उद्योगपति,पुजारी,नेता के अलावा आम
आदमी भी। डाक्टर,वकील,व्यापारी ये
सभी चाहते थे कि आम आदमी पानी में कूद
जाए। वह तैरकर पार जा सकता है, हम नहीं।
उन्होंने आम आदमी से कूद जाने को कहा,
तो उसने मना कर दिया। बोला,
"मैं जब डूबने को हो जाता हूँ तो आप में से कौन
मेरी मदद को दौड़ता है, जो मैं आपकी बात
मानूँ? "
जब आम आदमी काफी मनाने के बाद
भी नहीं माना, तो ये लोग नेता के पास गए,
जो इन सबसे अलग एक तरफ बैठा हुआ था।
इन्होंने सब-कुछ नेता को सुनाने के बाद कहा,
"आम आदमी हमारी बात नहीं मानेगा तो हम उसे
पकड़कर नदी में फेंक देंगे।"
नेता ने कहा,
"नहीं-नहीं ऐसा करना भूल होगी। आम
आदमी के साथ अन्याय होगा। मैं देखता हूँ उसे।
मैं भाषण देता हूँ। तुम लोग भी उसके साथ
सुनो।"
नेता ने जोशीला भाषण आरम्भ किया जिसमें
राष्ट्र,देश, इतिहास,परम्परा की गाथा गाते हुए,
देश के लिए बलि चढ़ जाने के आह्वान में हाथ
ऊँचा कर कहा,
"हम मर मिटेंगे, लेकिन अपनी नैया नहीं डूबने
देंगे…नहीं डूबने देंगे…नहीं डूबने देंगे"….!
सुनकर आम आदमी इतना जोश में आया कि वह
नदी में कूद पड़ा।

मानव

** पँ. शिवप्रसाद त्रिपाठी 'आचार्य' **

मानव शरीर मेँ पेट का स्थान नीचे है , हृदय का ऊपर और मस्तिष्क का सबसे ऊपर । 
पशुओँ की तरह समान्तर रेखा मे नही है !!
मनुष्य तथा पशु के शरीर की रचना मेँ अन्तर तथा इनकी वृत्तियोँ (व्यवहार)
मेँ अन्तर का चित्रण करते हुए कहा गया है कि -->
मनुष्य शरीर मेँ मस्तिष्क का स्थान सबसे ऊपर है ,जिसका सम्पूर्ण शरीर पर नियन्त्रण रहता है।
पेट की इच्छाओँ पर तथा हृदय की अनुभूतियोँ पर भी मस्तिष्क का नियन्त्रण रहता है ।
मस्तिष्क ही मनुष्य और पशु मेँ अन्तर का मुख्य कारक है ।
पशु के शरीर मेँ मस्तिष्क ,हृदय और पेट समान्तर रेखा मेँ रहते हैँ ।
अतः उसकी क्रियाओँ मेँ ,चिन्तन , अनुभूति और भोग का एक ही स्तर है अर्थात्
पशु पेट की ,तथा शरीर जन्य भोग क्रियाओ पर आरुढ़ रहता है । इन क्रियाओँ के सम्मुख उसका मस्तिष्क
विवश और निरीह दशा को प्राप्त हो जाता है । इसी अवस्था को पशु या पशुता कहा जाता है ।
इस प्रकार मनुष्य मेँ चिन्तन प्रथम , अनुभूति द्वितीय और भोग तृतीय स्तर की क्रियाएँ होती हैँ ,
जबकि पशु मेँ भोग , अनुभूति , तथा चिन्तन समान स्तर की क्रियाएँ हैँ ।
यदि मनुष्य शरीर मे चिन्तन की प्रधानता न हो तो वह मनुष्य ही नहीँ है । 
"मनुष्य चिन्तन प्रधान होता है।" यदि किसी मनुष्य मेँ भोग तथा शारीरिक वासनाओँ की प्रधानता है तो वह
पशु है ।

(श्री रामवृक्ष बेनीपुरी के निबन्ध "गेहूँ बनाम गुलाब" पर आधारित )

अकबर-बीरबल

सम्राट अकबर के नवरत्नों में उसका मन्त्री बीरबल भी था ;वह बहुत बुद्धिमान था !
एक बार अकबर दरबार में यह सोच कर आये कि आज बीरबल को भरे दरबार में शर्मिंदा करना है ;इसके लिये वे बहुत तैयारी करके आये थे !आते ही अकबर ने बीरबल के सामने अचानक 3 प्रश्न प्रस्तुत कर दिये -ईश्वर कहाँ रहता है ?वह कैसे मिलता है ?और वह करता क्या है ?
बीरबल इन प्रश्नों को सुनकर सक-पका से गये और बोले -जहाँपनाह इन प्रश्नों के उत्तर मै आपको कल दूँगा !जब बीरबल घर पहुँचे तो वह बहुत उदास थे !उनके पुत्र ने जब उनसे पूछा तो उन्होंने बताया -बेटा आज अकबर बादशाह ने मुझसे एक साथ तीन प्रश्न -ईश्वर कहाँ रहता है ?वह कैसे मिलता है ?और वह करता क्या है ?पूछे हैं !मुझे उनके उत्तर सूझ नही रहे हैं और कल दरबार में इनका उत्तर देना है !बीरबल के पुत्र ने कहा -पिता जी कल आप मुझे दरबार में अपने साथ ले चलना मैं बादशाह के प्रश्नों के उत्तर दूँगा !पुत्र की हठ के कारण बीरबल अगले दिन अपने पुत्र को साथ लेकर दरबार में पहुँचे !
बीरबल को देख कर बादशाह अकबर ने कहा -बीरबल मेरे प्रश्नों के उत्तर दो !बीरबल ने कहा -जहाँपनाह आपके प्रश्नों के उत्तर तो मेरा पुत्र भी दे सकता है !अकबर ने बीरबल के पुत्र से पहला प्रश्न पूछा -बताओ ईश्वर कहाँ रहता है ?बीरबल के पुत्र ने एक गिलास शक्कर मिला हुआ दूध बादशाह से मँगवाया और कहा -जहाँपनाह दूध कैसा है ?अकबर ने दूध चखा और कहा कि ये मीठा है !-परन्तु बादशाह सलामत क्या आपको इसमें शक्कर दिखाई दे रही है ?बादशाह बोले -नही वह तो इस दूध में घुल गयी है !-जहाँपनाह जैसे शक्कर दूध में घुल गयी है परन्तु वह दिखाई नही दे रही है ;ईश्वर भी इसी प्रकार संसार की हर वस्तु में रहता है !बादशाह ने सन्तुष्ट होकर अब दूसरे प्रश्न का उत्तर पूछा -बताओ ईश्वर मिलता कैसे है ?बालक ने कहा -जहाँपनाह थोड़ी दही मँगवाइये !बादशाह ने दही मँगवाई तो बीरबल के पुत्र ने कहा -जहाँपनाह क्या आपको इसमें मक्खन दिखाई दे रहा है !बादशाह ने कहा -मक्खन तो दही में है पर इसको मथने पर ही वह दिखाई देगा !बालक ने कहा -जहाँपनाह मन्थन करने पर ही ईश्वर के दर्शन हो सकते हैं !
बादशाह ने सन्तुष्ट होकर अब अन्तिम प्रश्न का उत्तर पूछा -बताओ ईश्वर करता क्या है ?बीरबल के पुत्र ने कहा -जहाँपनाह इसके लिये आपको मुझे अपना गुरू स्वीकार करना पड़ेगा !अकबर बोले -ठीक है तुम गुरू और मैं तुम्हारा शिष्य !अब बालक ने कहा -जहाँपनाह गुरू तो ऊँचे आसन पर बैठता है और शिष्य नीचे !अकबर ने बालक के लिये सिंहासन खाली कर दिया और स्वयं नीचे बैठ गये !
अब बालक ने सिंहासन पर बैठ कर कहा -जहाँपनाह आपके अन्तिम प्रश्न का उत्तर तो यही है !अकबर बोले -क्या मतलब ;मैं कुछ समझा नहीं ?बालक ने कहा -जहाँपनाह ईश्वर यही तो करता है पल भर में राजा को रंक बना देता है और भिखारी को सम्राट बना देता है !

Thursday, 21 February 2013

मेरी दादी मस्टरानी

दोस्तोँ ये बात उस समय की है जब मेरी दादी प्राइमरी की अध्यापिका बनी थी आइये सुनते हैँ उन्ही की जुबानी-
"डिप्टी साहब कुछ अधिकारियोँ के साथ गाँव आए हुए थे, गाँव के लोग अधिकारियोँ को देखकर सहम गये, क्योँकि डिप्टी साहब दसवीँ पास थे इसलिये गाँव के लोग उनकी बहुत इज्जत करते थे । गाँव मेँ आते हीँ डिप्टी साहब ने कहा, "हम लोग प्राइमरी के लिये मास्टर खोज रहे हैँ, क्या कोई है गाँव का जिसने पाँचवी पास किया है?"
सुधाकर चाचा बोले- अरे डिप्टी साहब ई गाँव माँ पाँच पास कहाँ मिलिहैँ ।
डिप्टी साहब- देखो अगर कोई हो तो बता दो, 75 रु. महीने तनख्वाह मिलेगी ।
सुधाकर चाचा- अब साहेब मनसेधु (पुरुष) तौ नाही बाटेन, एक एही हमार बिटियवा बाटै, चौथी तक बढ़े बा।
डिप्टी साहब- ठीक है आप अपनी बेटी को बुलाइये।
सुधाकर चाचा- लेकिन साहेब ऊ तौ क,ख,ग,घ बिसर गै बा ।
डिप्टी साहब- कोई बात नहीँ सब याद हो जाएगा,
.
.
और उसी दिन गाँव के स्कूल मेँ मेरी दादी की नियुक्ति हो गयी ।
आज मेरी दादी को पेँसन मिल रहा है, और अक्सर वो यही सवाल करती हैँ,
का भवा बेटवा तोहरे नौकरिया कै ?
.
.
अब दादी जी को क्या पता कि तब और अब मेँ कितना फर्क है, अब तो डाक्टर, इन्जीनियर और पीएचडी डिग्री धारक कतार मेँ खड़े हैँ प्राइमरी की नौकरी के लिये ।
फिर भी सरकार को योग्य अध्यापक नही मिल पा रहे हैँ, वाह रे जमाना !!!

सच्ची प्रार्थना



एक लड़का था..

बहुत ही नेक और

होशियार था . पढ़ने में

भी काफी तेज था ..

एक दिन वो मंदिर में

गया ..

मंदिर के अन्दर

सभी भक्तो भगवान के

दर्शन

कर रहे थे और मंत्र बोल

रहे थे ..कुछ भक्त

स्तुतिगान भी कर रहे थे ..

कुछ भक्त संस्कृत के

काफी मुश्केल श्लोक

भी बोल रहे थे ..

लड़के ने कुछ देर यह सब

देखा और उसके चहेरे

पर

युही मायूशी छा गयी ..

क्युकी उसे यह सब

प्रार्थना और मंत्र

बोलना आता नहीं था ..

कुछ देर वहा खड़ा रहा और

कुछ उपाय खोजने

लगा ..

लड़के के चहेरे पर

मुस्कराहट छा गयी ..उसने

अपनी आँखे बंध की , अपने

दोनों हाथ जोड़े और

दस बार अ आ इ ई

(हिन्दीवर्णमाला) बोल

गया …

मंदिर के पुजारी ने यह

देखा उसने लड़के से

पूछा की ” बेटे तुम यह

क्या कर रहे हो , लड़के ने

पूरी बात बताई … “

पुजारी ने कहा की ” बेटे

भगवान् से इस तरह से

प्रार्थना नहीं की जा सकती ,

तुम तो अ आ इ ई

बोल रहे हो..”

लड़के ने उत्तर दिया की ”

मुझे प्रार्थना , मंत्र ,

गीत नहीं आते . मुझे सिर्फ

अ आ इ ई

ही आती है . प्रार्थना ,

मंत्र , गीत यह सब अ

आ इ ई से ही बनते है . में दस

बार अ आ इ ई

बोल गया हूँ . यह सब शब्द

में से भगवान अपने

लिए खुद प्रार्थना , मंत्र ,

गीत बना लेंगे..”

लड़के की बात सुनकर

पुजारी जी चुप हो गए .

उनको अपनी भूल

का अहेसास हुआ .. उन्होंने

लड़के की समझ

को स्वीकार किया..

बोध –शीख

प्रार्थना हदय को साफ

और निर्मल करती है ..

शब्दों का महत्व नहीं है –

भाव का महत्व है ..

नेक दिल से की हुई

प्राथना भगवान तक जरूर

पहुचती है ..

प्रार्थना के अन्दर जब

भाव मिल जाता है

तो भगवान् जरूर मिलते है..

राष्ट्रभाषा

एक बूढ़ी औरत....
राजघाट पर बैठे- बैठे रो रही थी
न जाने किसका पाप था जो
अपने आंसुओं से धो रही थी।
मैंने पूछा- माँ! तुम कौन?
मेरी बात सुन कर
वह बहुत देर तक रही मौन
लेकिन जैसे ही उसने
अपना मुह खोला
लगा दिल्ली का सिंहासन डोला
वह बोली- अरे! तुम जैसे
नालायको के कारण शर्मिंदा हूँ,
न जाने अब तक क्यो जिंदा हूँ।
अपने लोगो की उपेक्षा के कारण
तार- तार हूँ, चिंदी हूँ,
मुझे गौर से देख...
मै राष्ट्रभाषा हिन्दी हूँ।
जिसे होना था महारानी
आज नौकरानी है
हिन्दी के आँचल में तो है सद्भाव
मगर आँखों में पानी है।
गोरी मेम को दिल्ली की गद्दी
और मुझे बनवास ?
कदम- कदम पर होता है
मेरा उपहास।
सारी दुनिया भारत को देख
कारण चमत्कृत है
एक भाषा- माँ अपने ही घर
में बहिष्कृत है
बेटा, मै तुम लोगों के
पापो को ही
बासठ वर्षो से बोझ की तरह
ढो रही हूँ
कुछ और नही कर सकती
इसलिए रो रही हूँ।
अगर तुम्हे मेरे आंसू
पोंछने है तो आगे आओ
सोते हुए देश को जगाओ
और इस गोरी मेम को हटा कर
मुझे गद्दी पर बिठाओ
अरे, मै हिन्दी हूँ
मुझसे मत डरो
हर भाषा को लेकर चलती हूँ
और सबके साथ
दीपावली के दीपक- सा जलती हूँ।

Monday, 18 February 2013

मंजिल मिल ही जायेगी भटकते ही सही, 

                           गुमराह तो वो है जो घर से निकले ही नहीं'

आतंकवाद

नमस्कार ! मेरा नाम आतंकवाद है। मेरे पिताजी का नाम 'अमेरिका' एवं माताजी का नाम 'पाकिस्तान' है। मुझे शांतिप्रिय देशों में आतंक और दहशत फैलाने के लिए पैदा किया गया था। लेकिन जब मै बड़ा हुआ तो अपनी फ़ितरत के मुताबिक पहले अपने बाप पर ही अटैक कर दिया ( 9/11, WTC, pentagon ). फिर मेरे बाप ने मुझे माँ के हवाले करते हुए कहा..लो खुद ही सम्हालो अपने लाडले को। तब से मै अक्सर अपनी माँ को तंग करता रहता हूँ ( बेनजीर भुट्टो का क़त्ल, लाल मस्जिद, बौद्ध स्तूप या क्वेटा धमाके आदि). कभी कभी मै अपने पड़ोसियों को भी परेशान करता हूँ ( भारतीय संसद पर हमला, 26/11, जकार्ता में ऑस्ट्रेलियन दूतावास पर हमला इत्यादि ). लेकिन सबसे ज्यादा मजा मुझे अपनी माँ को तंग करने में आता है... 
और वो बेचारी कुछ कर भी नहीं सकती..आखिर बेटा जो मै ठहरा उसका।
आजकल चीन मेरी देखभाल, रख रखाव और जरूरतों को पूरा कर रहा है इसलिए वो मुझे बहुत पसंद है। मै उसे कभी परेशान नहीं करता..उससे थोडा डरता भी हूँ। ISI, अल कायेदा, हिजबुल मुजाहिदीन, लश्कर ए तोएबा ..आप मुझे इनमे से कोई भी नामदे सकते हो।
कुछ बेवकूफ मुझे मजहब से जोड़कर देखते हैं, जबकि ऐसा कुछ नहीं है। मै आतंकवाद हूँ और सिर्फ आतंकवाद ..मेरा किसी जाति, धर्म, मजहब से कुछ नहीं लेना देना। हाँ ..मै मजहब के नाम पर बेवकूफ बनाकर लोगों का समर्थन जरूर पा लेता हूँ।

आज का सच - ....!!!!

पति : फोन आया था । कल सुबह मां आ रही है।
उनकी ट्रेन सुबह 4 बजे पहुंच जाएगी ।
पत्नी : अभी 4 माह पहले
ही तो तुम्हारी मां यहां से गई हैं।
फिर अचानक कैसे आ रही हैं ? कल रविवार है,
मैंने सोचा था,
कल थोड़ा आराम से उठूंगी, लेकिन
तुम्हारी मां को रविवार
को ही आना है और वह भी सुबह 4 बजे।
इतनी सुबह taxi
कहां से ..... ?

पति : मेरी... नहीं तुम्हारी मां आ रही है।

पत्नी : अरे वाह... मम्मी ......? ..... 2 माह
हो गये उनसे
मिले हुए। सुनो ना मेरे पास taxi वाले का नंबर
भी है उसे फोन कर
लेते हैं कल सुबह ठीक टाईम पर आ जाएगा।
चलो अच्छा है
कल सण्डे है बच्चों का स्कूल भी नहीं है वे
भी नानी को लेने
स्टेशन जा सकेंगे।

JOKE

बुलेट पर बैठे लड़के ने एक्टिवा पर बैठी लड़की से पूछा : कभी बुलेट चलाई है?

लड़की : स्कूटी तेज करके आगे निकल गई.

लड़का : फिर से बराबर आकर बोला: कभी बुलेट चलाई है?

लड़की ने स्कूटी धीरे कर ली और बुलेट वाला आगे निकल गया. आगे जाकर लड़के का एक्सीडेंट हो गया.

लड़की बोली : और चला ले बुलेट.

लड़का : यही तो पूछ रहा था कि चलाई है तो बता देती कि ब्रेक कैसे लगती है?

JOKE

राम: क्यों रो रहे हो दीपू…?

दीपू: मेरी मुर्गी मर गई…

राम: चुप हो जा, मेरा बाप मरा था, तब भी मैं इतना नहीं रोया…

दीपू: तेरा बाप अंडे देता था क्या…!!!

LOVE Marriage



                                                                  Love Lake

बेटा: मम्मी 'लव मैरिज' करने से घरवाले नाराज होते हैं क्या?

मम्मी : तू जरूर किसी चुड़ैल के चक्कर में होगा और यह सब तुझे उसी डायन ने कहा होगा। लड़कियां तो बस लड़कों को फंसाने में ही लगी रहती हैं। जहां अच्छा लड़का देखा शुरू हो गईं... बेटा तू इनसे बच के रहना। ये बहुत मक्कार और कमीनी होती हैं। और इनका तो खानदान भी.......

बेटा: बस मम्मी ... ऐसा कुछ नहीं है। वो तो डैडी बता रहे थे कि आप दोनों की लव मैरिज हुई थी!

स्त्रियाँ क्योँ लगाती हैँ माँग मेँ सिन्दूर और इसकी वैज्ञानिकता क्या?





(1)भारतीय वैदिक परंपरा खासतौर पर हिंदू समाज में शादी के बाद महिलाओं को मांग में सिंदूर भरना आवश्यक हो जाता है। आधुनिक दौर में अब सिंदूर की जगह कुंकु और अन्य चीजों ने ले ली है। सवाल यह उठता है कि आखिर सिंदूर ही क्यों लगाया जाता है। दरअसल इसके पीछे एक बड़ा वैज्ञानिक कारण है। यह मामला पूरी तरह स्वास्थ्य से जुड़ा है। सिर के उस स्थान पर जहां मांग भरी जाने की परंपरा है, मस्तिष्क की एक महत्वपूर्ण ग्रंथी होती है,जिसे ब्रह्मरंध्र कहते हैं। यह अत्यंत संवेदनशील भी होती है।यह मांग के स्थान यानी कपाल के अंत से लेकर सिर के मध्य तक होती है। सिंदूर इसलिए लगाया जाता है क्योंकि इसमें पारा नाम की धातु होती है। पारा ब्रह्मरंध्र के लिए औषधि का काम करता है। महिलाओं को तनाव से दूर रखता है और मस्तिष्क हमेशा चैतन्य अवस्था में रखता है। विवाह के बाद ही मांग इसलिए भरी जाती है क्योंकि विवाहके बाद जब गृहस्थी का दबाव महिला पर आता है तो उसे तनाव, चिंता और अनिद्रा जैसी बीमारिया आमतौर पर घेर लेती हैं।पारा एकमात्र ऐसी धातु है जो तरल रूप में रहती है। यह मष्तिष्क के लिए लाभकारी है, इस कारण सिंदूर मांग में भरा जाता है।

(2)मांग में सिंन्दूर भरना औरतों के लिए सुहागिन होने की निशानी माना जाता है। विवाह के समय वर द्वारा वधू की मांग मे सिंदूर भरने के संस्कार को सुमंगली क्रिया कहते हैं। इसके बाद विवाहिता पति के जीवित रहने तक आजीवन अपनी मांग में सिन्दूर भरती है। हिंदू धर्म के अनुसार मांग में सिंदूर भरना सुहागिन होने का प्रतीक है। सिंदूर नारी श्रंगार का भी एक महत्तवपूर्ण अंग है। सिंदूर मंगल-सूचक भी होता है। शरीर विज्ञान में भी सिंदूर का महत्त्व बताया गया है। सिंदूर में पारा जैसी धातु अधिक होनेके कारण चेहरे पर जल्दी झुर्रियां नहीं पडती। साथ ही इससे स्त्री के शरीर में स्थित विद्युतीय उत्तेजना नियंत्रित होती है। मांग में जहां सिंदूर भरा जाता है, वह स्थान ब्रारंध्र और अध्मि नामक मर्म के ठीक ऊपर होता है। सिंदूर मर्म स्थान को बाहरी बुरे प्रभावों से भी बचाता है। सामुद्रिक शास्त्र में अभागिनी स्त्री के दोष निवारण के लिए मांग में सिंदूर भरने की सलाह दी गई है।