टूटकर सपनो की जंजीर बिखर गई
जो बनाई थी हमने वो तस्वीर बिखर गई
बिखरे टुकडो में उम्मीदों की किरण ढूंढ़ते है
मौत के अंधेरो में जिंदगी का सबब ढूंढते है
हवाओं ने रुख बदला तो अब कोई चाह नहीं
जहाँ चलना मुमकिन हो ऐसी कोई राह नहीं
हमारे होंसले जब कुछ यूँ सिमटने लगते है
सन्नाटो और अंधेरो में जब हम भटकने लगते है
न जाने कहाँ और किस दुनिया में हम खो जाते है
खुद को नहीं जान पाते ऐसे अजनबी हो जाते है
सोचते है कि हर ख्वाब को टूट जाना ही होता है
खिलने के बाद हर फूल को मुरझाना ही होता है
खुशबू से जो अपनी महकाता है और जीवन में रंग भरता है
मुरझाने के बाद उस फूल को कौन याद करता है
कुछ इसी अंदाज में हम खुद को समझा लेते है
सच की तस्वीर से ख्वाबो की धूल हटा लेते है
बस ऐसे ही शिकवो का दौर चला जाता है
फिर बिखरे टुकडो में एक खूबसूरत सपना नजर आता है
इस सपनो के सागर में हम फिर से उतर जायेंगे
पता नहीं खुद को फिर धोखा देंगे या किनारों को पा जायेंगे
जो बनाई थी हमने वो तस्वीर बिखर गई
बिखरे टुकडो में उम्मीदों की किरण ढूंढ़ते है
मौत के अंधेरो में जिंदगी का सबब ढूंढते है
हवाओं ने रुख बदला तो अब कोई चाह नहीं
जहाँ चलना मुमकिन हो ऐसी कोई राह नहीं
हमारे होंसले जब कुछ यूँ सिमटने लगते है
सन्नाटो और अंधेरो में जब हम भटकने लगते है
न जाने कहाँ और किस दुनिया में हम खो जाते है
खुद को नहीं जान पाते ऐसे अजनबी हो जाते है
सोचते है कि हर ख्वाब को टूट जाना ही होता है
खिलने के बाद हर फूल को मुरझाना ही होता है
खुशबू से जो अपनी महकाता है और जीवन में रंग भरता है
मुरझाने के बाद उस फूल को कौन याद करता है
कुछ इसी अंदाज में हम खुद को समझा लेते है
सच की तस्वीर से ख्वाबो की धूल हटा लेते है
बस ऐसे ही शिकवो का दौर चला जाता है
फिर बिखरे टुकडो में एक खूबसूरत सपना नजर आता है
इस सपनो के सागर में हम फिर से उतर जायेंगे
पता नहीं खुद को फिर धोखा देंगे या किनारों को पा जायेंगे