हदे गमें हस्ती से गुजर क्यों नहीं जाते
जीना नहीं आता तो मर क्यों नहीं जाते
मंजिल को पाना है तो तूफ़ान भी मिलेंगे
डर अगर है तो कश्ती से उतर क्यों नहीं जाते
जीना नहीं आता तो मर क्यों नहीं जाते
मंजिल को पाना है तो तूफ़ान भी मिलेंगे
डर अगर है तो कश्ती से उतर क्यों नहीं जाते
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